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गांठ गोभी की खेती

गांठ गोभी देखने में शलजम की तरह दिखायी देती है। यह हल्के हरे रंग व सफेद तथा बैगनियां गांठ वाली होती है। यह सर्दी की फसल है। इसे 6 पी.एच. मान वाली भूमि चाहिए।

  1. भूमि व जलवायु – गांठ गोभी हर प्रकार की भूमि में होती है। लेकिन काली दोमट मिट्टी इसकी फसल के लिए अच्छी रहती है। यह सर्द जलवायु का पौधा है, गर्मी को सहन नहीं कर सकता। यह उत्तर भारत में ज्यादा मात्रा में होती है। दक्षिण भारत में गर्मी अधिक पड़ने से गांठ नहीं पड़ती है व फट जाती है। उत्तर भारत में साल भर तक चलती है।
  2. पौध तैयार करना – फूल गोभी, पत्ता गोभी की तरह ही गांठ गोभी की पौध तैयार की जाती है। इसमें 6 गुणा 4 वर्ग फुट की क्यारियां बनाकर उसमें केंचुए की या गोबर की खाद डाल दें फिर बीज छिड़क कर उंगलियों से मिला दें व पानी दें। 2-3 पानी देने पर उसकी पौध निकल जायेगी। पौध निकलते समय चिड़ियों का ध्यान जाये। इस तरह 20 दिन में पौध तैयार होगी।
  3. जमीन तैयार करना – एक तरफ पौध तैयार होती है तो दूसरी तरफ 3-4 जुताई करके खाद डाल दें, खाद सड़ी हुई गोबर की हो। कम्पोस्ट खाद डालकर फैला है तथा उपर एक हल्फी जोत लगा कर पाटा फेर दें। जब पौध तैयार हो जाये, त क्यारियां बना लें।
  4. पौध का स्थानान्तरण करना – तैयार की गई क्यारियों में एक-एक पु की दूरी पर गांठ गोभी लगा दें व पानी देते रहें। जब पत्ते फूटना चालू हो जाये तो खरपतवार शुरू करें। गांठ गोभी में दो-तीन बार गुड़ाई करें।
  5. खरपतवार निकालना – खरपतवार निकालना हर सब्जी में आवश्यक होता है। अत: गांठ गोभी में भी दो बार खरपतवार निकाल कर मिट्टी चढ़ा दें।
  6. पानी की मात्रा- हर पौधे के लिए पानी की आवश्यकता होती है। आलू की तरह गांठ गोभी में भी लगाते समय 2-3 दिन से पानी दें। जब पौधा लग जाये 5-6 दिन से पानी देते रहें। दो माह बाद इसकी गांठ आलू के तरह बन कर तैयार होगी। इसमें एक पेड़ में एक ही गांठ होती है। जिसका वजन 500 ग्राम से 1500 ग्राम तक होता है। पत्ते लगे रहने पर यह 15 दिन तक खराब नहीं होती।
  7. गांठ गोभी तोड़ने की विधि – गांठ गोभी को मूली की तरह उखाड़कर उसके उपरी पत्ते तोड़ लिए जाते हैं व शेष गांठ को स्वच्छ पानी से धोकर बिक्री योग्य बनाते हैं। सब्जी बेचने वाले उपर के पत्ते नहीं तोड़ते क्योंकि पत्ते तोड़ने से यह 2-3 दिन ही रह पाती है।
  8. रोग व नियंत्रण – इसमें भी पत्तों पर पत्ता छेदक बिमारी होती है जो पत्तों में छेद कर देती है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इसके बचाव के लिए पिसी हुई कली 200 • ग्राम और ठंडी राख 200 ग्राम दोनों को मिलाकर सख्त पुट्ठे पर रखें व फूकनी से पेड़ों पर फूंक दे कर छिड़क दें। यह कार्य 15 दिन के अन्दर में दो बार किया जाये, उस समय धूप होनी चाहिए।
  9. सर्दी का प्रकोप – इस पर सर्दी का प्रकोप नहीं होता, यह सर्दी का पौधा है। इस पर गर्मी का प्रभाव होता है, जिससे गांठ ज्यादा सख्त होता है।

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